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Thursday, July 30, 2009


हिंसा में मनोरंजन

-रघुवीर सहाय

अत्याचार के शिकार के लिए
समाज के मन में जगह नहीं
तब जो बताते हैं
वह उसका दुख नहीं
आपका मनोरंजन होता है.

15 comments:

  1. मुझे लगता है आपने यह सच का सामना पर लिखा है... अच्छा है

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  2. sach bolna aasaan hai

    snnaa mushkil hai !

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  3. बहुत उम्दा आगमन...
    गंभीरता के सिपाही बढ़ रहे हैं...
    शुभकामनाएं...

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  4. विष्णु साहब को
    हमारी भी शुभकामनायें

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  5. विष्णु साहब को
    हमारी भी शुभकामनायें

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  6. चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है.

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  7. Sach pe amadaa rahna bhi mushkil..uskee qeemat to Mahatama ne apnee jaan deke chukayee..

    http://shamasansmaran.blogspot.com

    http://kavitasbyshama.blogspot.co.

    http://aajtakyahantak-thelightbyalonelypath.blogspot.com

    http://shama-baagwaanee.blogspot.com

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  8. बहुत ही अच्छा ब्लॉग बनाया है सर आपने। मैंने ढूंढ कर पढ़ा, आपका पोस्ट। अब देखते हैं कि सच की ताकत का कितना असर होता है झूठों में। समाज में तो झूठों की भरमार है। कितना झूठा लोग को तो लालबत्ती मिल गया है। क्या कहियेगा।

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  9. Dhanyawaad
    Lage rahiye. Bhale hi kabhi jhooth kee vijay dikhayee dene lagti hai par sach ko thukraya nahin jaa sakta hai aur jeet sach kee kee rahti hai kyonki sach badalta nahin hai, sach hamesha ek hi rahti hai.

    aapka
    mahesh
    http://popularindia.blogspot.com/

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  10. बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

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  11. आप की रचना प्रशंसा के योग्य है . आशा है आप अपने विचारो से हिंदी जगत को बहुत आगे ले जायंगे
    लिखते रहिये
    चिटठा जगत मे आप का स्वागत है
    गार्गी

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  12. इस ब्लाग के सभी पाठकों एवं प्रतिक्रिया भेजने वाले सभी मित्रों को धन्यवाद। शुरूआत के लिए मैंने सच के बारे में रघुवीर सहाय और महेश्वर की दो विचारोत्तेजक टिप्पणियां दी हैं। साथ ही, रघुवीर सहाय की दो कविताएं, जो कम शब्दों में इतनी ज्यादा बातें कह जाने के कारण लंबे समय से मेरे दिलोदिमाग का हिस्सा बनी हुई हैं।
    अपनी लिखी चीजें मैं तीन अन्य ब्लाग एवं एक वेबसाइट पर देता रहा हूूं। कभी फुरसत में देखें तो प्रसन्नता होगी-
    http://rti.net.in/
    http://ndranchi.blogspot.com/
    http://rtistory.blogspot.com/
    http://vrajgadia.blogspot.com/

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  13. हिंसा में मनोरंजन को बढावा देने में संचार माध्यम अग्रणी हैं.

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